गत तीन दशकों में अनुवांशिकी के क्षैत्र में हुई आशातीत प्रगति ने जैव प्रोद्योगिकी के विभिन्न पहलुओं को एक मजबूत आधार प्रदान किया हैं| जैव प्रोद्योगिकी के सकारात्मक पहलुओं ने जहाँ मानव हितार्थ नए आयाम पैदा किये हैं वही दूसरी और इसके नकारात्मक पहलुओं ने इस क्षैत्र को विवादास्पद भी बनाया हैं| परन्तु आनुवंशिकी के ज्ञान का सृजनात्मक एवं विवेकपूर्ण उपयोग कर इन विवादों से बचा जा सकता है| इस पुस्तक के लिखकों ने पादपों की कोशिकनुवंशिकी, पादप प्रजनन एवं विकास पर समसामयिक एवं सारगर्भित विषयवस्तु प्रस्तुत की है| आशा है की यह पुस्तक पाठकों को आनुवंशिकी के क्षैत्र में हो रहे विकास की नवीनतम जानकारी के लिए सहायक सिद्ध होंगी|



Reviews
There are no reviews yet.