इस पुस्तक में समाजशास्त्र विषय के आधार-स्तम्भ एमाइल दुर्खीम के जीवन एवं चिन्तन की विस्तृत व्याख्या की गई हैं| उनकी प्रमुख रचनाओं के सार- संक्षेप के साथ ही उनके द्वारा विवेचित समाजशास्त्र की वैज्ञानिक व्याख्या, पद्धतिशास्त्र, तुलनात्मक पद्धति, प्रत्यक्षवाद, समाजों का वर्गीकरण, व्यक्ति और समाज के सम्बन्ध, सामाजिक उद्विकास का सिद्धान्त, नैतिकता का सिद्धान्त, मूल्यों का सिद्धान्त, ज्ञान का समाजशास्त्र, प्रकार्यवाद की अवधारणा, शिक्षा का सिद्धान्त एवं साम्यवाद आदि अनेक वैचारिक अवधारणा, ओघोगिक समाजो की समस्याएँ, समाजवाद एवं साम्यवाद आदि अनेक वैचारिक अवधारणाओ पर दुर्खीम की विचार - द्रष्टि का गहन विश्लेषण किया गया है| इसके साथ ही दुर्खीम की चार प्रमुख पुस्तकों में प्रस्तुत उनके सारगर्भित सिद्धान्त यथा: समाज में श्रम विभाजन, सामाजिक तथ्य, आत्महत्या तथा धर्म एवं धार्मिक जीवन के प्रारम्भिक स्वरुप की सूक्ष्म, गहन एवं विस्तृत संख्यिकीय - समाजशास्त्र विवेचना दुर्खीम की मूल पुस्तकों के अध्ययन के आधार पर इस पुस्तक में 6 प्रमुख अध्यायों के अन्तर्गत की गई है|
![Emieldurkiem[1]](https://beta.himanshupublications.com/wp-content/uploads/2020/07/Emiel20durkiem1.jpg)


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