महिलाएं लगभग आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती हैं और यदि आधी जनसंख्या विकास की धारा से ही वंचित रहेगी तो देश का सम्पूर्ण विकास कैसे होगा इसलिए देश के विकास कार्यक्रमों की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों से हुई है| विगत दो दशकों में ग्रामीण महिलाओं के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूह एक मूल्यवान यंत्र सिद्ध हुआ है इस पुस्तक में महिला को पूर्ण रूप से सशक्त करने के लिए उनको अधिकार और कानून के बारे में भी अवगत कराया है| स्वयम सहायता समूह के लाभों के बारे में बताया है जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ गत 70 वर्ष से कम्युनिटी उत्थान के लिए व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रहा है| डॉ. मंजू माणडोत भी इस कार्य से जुड़ कर महिला सशक्तिकरण में अपना योगदान डे रही है| पुस्तक निश्चित रूप से यह सोशल वर्क के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए उपयोगी है| मुझे पूरा विश्वास है की यह पुस्तक महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के साथ - साथ उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ेगी और उनके जीवन को प्रकाशित करेगी|




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